Friday, 30 October 2026

चेहरे पे झूठी हँसी की इक चादर ओढ़कर

 तेरी यादों का समंदर आँखों में बहता रहा,

कोई पूछता रहा हाल, मैं चुप्पी से सहता रहा।

तुझे आईना समझकर हमने सीने से लगाया था

तूने तोड़ा भी बेदर्दी से, और दिल न धड़का ज़रा।


चेहरे पे झूठी हँसी की इक चादर ओढ़कर,

महफ़िल में हर बात पे बेवजह मुस्कुराता हूँ,

इतने ज़ख़्म मिले मुझको तेरे आने-जाने से,

मैं खुद से रूठ गया हूँ अब तेरे इस ज़माने से।


तुझे पाकर भी हम ख़ुद को कहाँ बचा पाए,

तेरी चाहत में हम तो सब कुछ गँवा आए!

तेरी आँखों की नमी जो हमसे देखी न जाती थी,

तूने देखा तक नहीं, हम कितना अश्क बहा आए...

हाँ, वफ़ा करके हम अपनी सज़ा बढ़ा आए!


अब शिकायत किससे करूँ इस बेगाने जहाँ में,

खुद को ही खुद से जुदा करके आता हूँ...

इतने ज़ख़्म मिले... तेरे मिलने से...

बस मुस्कुराकर... ग़म छुपाता हूँ...



Thursday, 24 September 2026

अंदर से इतना खोखला कर दिया है.

आजकल दिल और दिमाग पर एक अजीब सी ख़ामोशी और भारीपन छाया रहता है। कभी कभी लगता है जैसे पूरी दुनिया आगे बढ़ रही है और मैं कहीं पीछे, बिल्कुल अकेली छूट गई हूँ। इतने लोगों के बीच रहकर भी ऐसा खालीपन महसूस होता है कि मानो कोई सुनने वाला या समझने वाला है ही नहीं।

​अंदर ही अंदर हिम्मत टूटने लगी है खुद को बहुत लाचार और कमज़ोर पाने लगी हूँ। कभी कभी यह घुटन इतनी बढ़ जाती है कि मन में सब कुछ छोड़ देने के मिट जाने के ख्याल आने लगते हैं। दिन तो जैसे तैसे कट जाता है लेकिन रातें और ज़्यादा डराने लगती हैं। नींद में भी चैन नहीं मिलता वही खौफनाक सपने पीछा करते हैं जैसे कोई मुझ पर हमला कर रहा हो मुझे चोट पहुँचा रहा हो। सुबह आँख खुलती है तो दिल घबराया हुआ होता है। समझ ही नहीं आता कि ज़िंदगी अचानक इतनी भारी क्यों लगने लगी है

कभी बैठकर बस यही सोचती रहती हूँ कि इस भरी दुनिया में सच में कोई मेरा अपना नहीं है। चारों तरफ लोग हैं, चेहरे हैं, बातें हैं, पर अंदर एक ऐसा वीराना है जिसे कोई देख नहीं पाता। जब भी किसी अपने की तलाश में आँखें उठाती हूँ, तो हर रिश्ता दूर और बेगाना सा नज़र आता है। यह एहसास दिल को भीतर तक निचोड़ देता है कि अगर मैं चीख़ भी दूँ तो शायद कोई मुड़कर नहीं देखेगा। इसी अकेलेपन ने मुझे अंदर से इतना खोखला कर दिया है कि अपनी ही साँसें एक बोझ जैसी लगने लगी हैं।



Saturday, 8 August 2026

मुश्किल तो तब लगा…

ख़ुद को आपको सौंपना आसान था,

मुश्किल तो तब लगा… 

जब एहसास हुआ कि मेरी क़ीमत ही नहीं समझी गई।




Tuesday, 4 August 2026

माफ़ी माँगना आसान नहीं होता,

माफ़ी माँगना आसान नहीं होता, 

और 

बिना माफ़ी के किसी को माफ़ कर देना 

उससे भी ज़्यादा मुश्किल होता है।"



Saturday, 4 July 2026

सच बताना मेरा कर्तव्य है

 सच बताना मेरा कर्तव्य है,

उसे सही मानना या गलत, यह आपका निर्णय है।



Tuesday, 2 June 2026

स्वयं पर विजय पाना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।

 मन की शांति का अर्थ है अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार पर नियंत्रण रखना। जीवन में अनेक परिस्थितियाँ ऐसी आती हैं जो हमें क्रोधित, दुखी या चिंतित कर सकती हैं, लेकिन जो व्यक्ति स्वयं को नियंत्रित रखना सीख लेता है, वही सच्ची शांति का अनुभव करता है। आत्म-नियंत्रण हमें सही निर्णय लेने, रिश्तों को बेहतर बनाने और कठिन समय में शांति बनाए रखने की शक्ति देता है। 

जीवन में जिसने संघर्षों को सहना और परिस्थितियों का सामना करना सीख लिया, वही आगे चलकर बड़ी सफलताएँ हासिल करता है। साथ ही, उन लोगों के लिए भी अच्छा सोचिए जो आपके किसी काम न आ सकें, क्योंकि सच्ची इंसानियत स्वार्थ नहीं, बल्कि सद्भावना में होती है। हर किसी को अपनी एक मुस्कान, कुछ अच्छे शब्द और थोड़ी सी संवेदना देकर सम्मानित कीजिए, क्योंकि कई बार आपका अपनापन किसी के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन सकता है।

यह आवश्यक नहीं कि हर व्यक्ति की सोच, क्षमता और प्रतिभा आपकी जैसी हो। जो कार्य आप कर सकते हैं, संभव है कोई और न कर पाए, और जो कार्य कोई दूसरा कुशलता से कर ले, वह शायद आप न कर सकें। इसलिए स्वयं की तुलना दूसरों से करके दुखी होने के बजाय अपनी विशेषताओं को पहचानिए और उनका सम्मान कीजिए। हर व्यक्ति अपने आप में अद्वितीय है और उसकी अपनी अलग पहचान होती है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने मन, वाणी और कर्म पर संयम रखते हुए सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए, क्योंकि स्वयं पर विजय पाना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है। 




Tuesday, 19 May 2026

यक़ीन ही सबसे बड़ी ताक़त है।

 जिस इंसान को अपने हौसलों पर यक़ीन हो,

उसे दुनिया का कोई डर हरा नहीं सकता।

रास्ते मुश्किल ज़रूर होते हैं,

मगर बंद कभी नहीं होते।

याद रखो 

यक़ीन ही सबसे बड़ी ताक़त है।

-Alisha 



चेहरे पे झूठी हँसी की इक चादर ओढ़कर

 तेरी यादों का समंदर आँखों में बहता रहा, कोई पूछता रहा हाल, मैं चुप्पी से सहता रहा। तुझे आईना समझकर हमने सीने से लगाया था तूने तोड़ा भी बेदर...