Friday, 6 March 2020

Presentation - The African Literature Paper - 14

No comments:

Post a Comment

रूह तक सज़्दा-ए-ख़ामोशी में झुक जाती है

बड़े लोगों से ताल्लुक़ नहीं रखना चाहिए… क्योंकि उनकी बातें रौशनी नहीं,  अक्सर फ़रेब होती हैं। हम उन्हें ख़्वाब समझ लेते हैं,  और खुद को उन्ह...