Tuesday, 2 December 2025

मंज़िल भी तुम हो और सफ़र भी तुम हो.

आवाज़ दबाने वाले बहुत मिलेंगे,

पर पहचान बनाने वाली सिर्फ तुम हो.

दुनिया याद रखेगी सिर्फ तुम्हारी 

उड़ान, उनका शोर नहीं.

उनकी कोशिश तुम्हें रोकने की होगी,

तुम्हारी ज़िद इतिहास बनाने की होनी चाहिए.

लोग चर्चा करेंगे तुम्हारी क़िस्मत की,

तुम कहानी लिखोगी अपनी मेहनत की.

हार मानने का सवाल ही नहीं,

क्योंकि मंज़िल भी तुम हो और सफ़र भी तुम हो.

Alisha


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ख़ुद को आपको सौंपना आसान था, मुश्किल तो तब लगा…  जब एहसास हुआ कि मेरी क़ीमत ही नहीं समझी गई।