मैं नहीं हम
मेरा नहीं अपनों का..
मेरी ख़ुशी नहीं अपनों की ख़ुशी..
मेरा दुःख नहीं अपनों का दुःख..
मेरा काम नहीं अपनों का काम..
अगर हम सफल नहीं हैं या हमारा कोई मूल्य नहीं है, तो किसी और को दोष न दें, किसी को न कोसें। आईने में देखें और अपनी गलती ढूँढें। और गलती की...