Sunday, 15 June 2025

 

कुछ बातें हमें बर्दास्त कर नी पड़ती है.. 

क्योंकि उनसे हमारे अपनों की खुशिया जुडी होती है..

और अपनों की खुशियों के आगे तो कुछ भी नहीं है..


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ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे

ना तो कारवाँ की तलाश है, ना हमसफ़र की तलाश है… जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे, बस उसी रहगुज़र की तलाश है। (जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतल...