कभी कभी सुना हुआ सच सच नहीं होता है, सच जानने के लिए दिमाग को नहीं दिल को दिल से पूछना चाहिए कि भाई क्या हुआ था? सब पता चल जायेगा, पर आपको क्यों सुनना है सच? जब की आप वो सुन ही नही पाओगे यह फिर सुन के नजर अंदाज कर दोगे....
ना तो कारवाँ की तलाश है, ना हमसफ़र की तलाश है… जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे, बस उसी रहगुज़र की तलाश है। (जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतल...
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