सुबह हो या श्याम कल हो या अब
आपकी याद में इतने पन्ने लिख लिए
की
अब तो शाही भी इन्कार कर रही है
आपके नाम का दीदार करने से।
आजकल दिल और दिमाग पर एक अजीब सी ख़ामोशी और भारीपन छाया रहता है। कभी कभी लगता है जैसे पूरी दुनिया आगे बढ़ रही है और मैं कहीं पीछे, बिल्कुल अक...
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