Thursday, 24 June 2021

शाही की इनकारी

 

सुबह हो या श्याम कल हो या अब
आपकी याद में इतने पन्ने लिख लिए
की
अब तो शाही भी इन्कार कर रही है
आपके नाम का दीदार करने से।




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मुश्किल तो तब लगा…

ख़ुद को आपको सौंपना आसान था, मुश्किल तो तब लगा…  जब एहसास हुआ कि मेरी क़ीमत ही नहीं समझी गई।