सुबह हो या श्याम कल हो या अबआपकी याद में इतने पन्ने लिख लिएकीअब तो शाही भी इन्कार कर रही हैआपके नाम का दीदार करने से।
बड़े लोगों से ताल्लुक़ नहीं रखना चाहिए… क्योंकि उनकी बातें रौशनी नहीं, अक्सर फ़रेब होती हैं। हम उन्हें ख़्वाब समझ लेते हैं, और खुद को उन्ह...
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