ना तो कारवाँ की तलाश है,
ना हमसफ़र की तलाश है…
जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे,
बस उसी रहगुज़र की तलाश है।
(जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतलब
जो रास्ता इंसान को ईश्वर (सच्चाई) से जोड़कर
उसे उसके अपने असली अस्तित्व से मिला दे।
आवाज़ दबाने वाले बहुत मिलेंगे, पर पहचान बनाने वाली सिर्फ तुम हो. दुनिया याद रखेगी सिर्फ तुम्हारी उड़ान, उनका शोर नहीं. उनकी कोशिश तुम्हें रो...
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