ना तो कारवाँ की तलाश है,
ना हमसफ़र की तलाश है…
जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे,
बस उसी रहगुज़र की तलाश है।
(जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतलब
जो रास्ता इंसान को ईश्वर (सच्चाई) से जोड़कर
उसे उसके अपने असली अस्तित्व से मिला दे।
अगर हम सफल नहीं हैं या हमारा कोई मूल्य नहीं है, तो किसी और को दोष न दें, किसी को न कोसें। आईने में देखें और अपनी गलती ढूँढें। और गलती की...
No comments:
Post a Comment