ना तो कारवाँ की तलाश है,
ना हमसफ़र की तलाश है…
जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे,
बस उसी रहगुज़र की तलाश है।
(जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतलब
जो रास्ता इंसान को ईश्वर (सच्चाई) से जोड़कर
उसे उसके अपने असली अस्तित्व से मिला दे।
बड़े लोगों से ताल्लुक़ नहीं रखना चाहिए… क्योंकि उनकी बातें रौशनी नहीं, अक्सर फ़रेब होती हैं। हम उन्हें ख़्वाब समझ लेते हैं, और खुद को उन्ह...
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