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क्योंकि मंज़िल भी तुम हो और सफ़र भी तुम हो.
आवाज़ दबाने वाले बहुत मिलेंगे, पर पहचान बनाने वाली सिर्फ तुम हो. दुनिया याद रखेगी सिर्फ तुम्हारी उड़ान, उनका शोर नहीं. उनकी कोशिश तुम्हें रो...
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कुछ बातें हमें बर्दास्त कर नी पड़ती है.. क्योंकि उनसे हमारे अपनों की खुशिया जुडी होती है.. और अपनों की खुशियों के आगे तो कुछ भी नहीं है..
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ज़िन्दगी में कब क्या हो जायेगा कुछ नहीं पता इसलिए सब के साथ प्यार से रहो...
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