Thursday, 10 October 2019

Presentation Paper 9 The Modernist literature

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ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे

ना तो कारवाँ की तलाश है, ना हमसफ़र की तलाश है… जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे, बस उसी रहगुज़र की तलाश है। (जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतल...