सुबह हो या श्याम कल हो या अब
आपकी याद में इतने पन्ने लिख लिए
की
अब तो शाही भी इन्कार कर रही है
आपके नाम का दीदार करने से।
सुबह हो या श्याम कल हो या अब
आपकी याद में इतने पन्ने लिख लिए
की
अब तो शाही भी इन्कार कर रही है
आपके नाम का दीदार करने से।
हम इश्क में इतने डूब गए की
अब तो किनारा ही नहीं मिलता।
दुनिया में कहीं खो गए की
अब तो रास्ता ही नहीं मिलता।
इस कदर हम टूट गए है की
अब तो दिल कहीं नहीं मिलता।
अपनो ने हमे ठुकराया की
यहां औरो से प्यार कहा मिलता।
दर्द ए दिल इतना तड़पा की
मरहम यहां कहां मिलता।
हम केद है तेरे इश्क के पिंजरे में
यहां आसमान कहां मिलता।
- अलीशा
कोई नई फेशन आती है ओर तुरंत हम
खरीद लेते है, ओर जट से पहेन लेते है।
अगर ऐसा होता तो अपको अभी खरीद लेते,
ओर अपने आप में आपको पहना देते।
आपको फेशन की वेरायटी नहीं बनाना है,
की आज ट्रेंड है ओर कल नहीं होगा।
आपको एक धागा बनाना वह ऐसा की,
जो मुझसे चालू होके आप में ख़तम होो।
आपको मेरी जरूरत नहीं बनाना है,
जरूरत कभी होती है कभी नहीं होती।
आपको मेरा बेहतरीन शोख बनाना है।
क्युकी...
शोख तो कभी मारने से भी नहीं मिटता।
- अलीशा
रंगो कि अब जरूरत नहीं
क्युकी
आंखो से निकले पानी का
रंग ही इतना गहरा था
कि
भीगा दिया पूरे चेहरे को
और
कर दिया पूरे चेहरे को लाल
જો એવું ક્યારેક થાય
મારા હાથ ની લકીરોમા
તારી લકીરો સમાઈ જાય
જો એવું ક્યારેક થાય
મારા ધબકારા નો અવાજ
તારા કાનમા સંભળાય જાય
જો એવું ક્યારેક થાય
તારી આંખ ના આંસુ
મારી આંખમા વહી જાય
જો એવું ક્યારેક થાય
તારા આ દિલ નું દર્દ
મારા હૃદય ને મળી જાય
જો આવું ક્યારેક થાય
તારી મંજિલ નું સાચું
એંધાણ મને મળી જાય
જો એવું ક્યારેક થાય
તારો મીઠો મધુર સ્પર્શ
મારા રુંહ મા ભળી જાય
જો એવું ક્યારેક થાય
મારા કાગળ નું લખાણ
અચાનક તને મળી જાય
જો એવું ક્યારેક થાય
હકીકત હોઈ કે સપના મા
હા મા હા તારી મળી જાય
- Alisha
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वो ख्वाइश भी सही नहीं
जो मुमकिन हो ना सके।
वो यादें भी सही नहीं
जो साथ रह ना सके।
वो प्यार भी सही नहीं
जो मुस्कुराहट बन ना सके।
वो तन्हाइयां भी सही नहीं
जो इस कदर रुला ना सकेे।
वो ख्वाब भी सही नहीं
जो खुली आंखो से पूरे ना हो सके। - अलीशा
हम इश्क में इतने डूब गए की
अब तो किनारा ही नहीं मिलता।
दुनिया में कहीं खो गए की
अब तो रास्ता ही नहीं मिलता।
इस कदर हम टूट गए है की
अब तो दिल कहीं नहीं मिलता।
अपनो ने हमे ठुकराया की
यहां औरो से प्यार कहा मिलता।
दर्द ए दिल इतना तड़पा की
मरहम यहां कहां मिलता।
हम केद है तेरे इश्क के पिंजरे में
यहां आसमान कहां मिलता।
- अलीशा
ख़ुद को आपको सौंपना आसान था, मुश्किल तो तब लगा… जब एहसास हुआ कि मेरी क़ीमत ही नहीं समझी गई।