आज तक यही कहा है और यही कहूँगी में मैं हूं। ना आज और ना कल मैं तुम नहीं हो पाऊंगी। जैसे तुम्हारी सोच तुम्हारा काम, उठना, बैठना, खाना, रहना,तुम्हारे मित्र तुम्हारा परिवार और तुम्हारा व्यक्तित्व...वह सिर्फ तुम हो..वैसा ही मेरा शरीर,मेरी सोच, मेरा काम वह मेरा व्यक्तित्व है... वह सिर्फ मैं हूं। जरुरी नहीं है की हम एक हो..जरुरी नहीं है की जैसा तू सोचता है वैसा ही मैं सोचती हूं और हा सुनो वह इसलिए क्युकी व्यक्तितव अलग है तुम तुम हो और में मैं हूं...
Sunday, 6 February 2022
व्यक्तित्व की पहचान
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मन की शांति का अर्थ है अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार पर नियंत्रण रखना। जीवन में अनेक परिस्थितियाँ ऐसी आती हैं जो हमें क्रोधित, दुखी या च...
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"लड़कियों सुनो, अच्छा बनने के लिए कभी-कभी दुनिया की नजरों में बुरा बनना पड़ता है। पर डरना मत, क्योंकि थोड़ी तकलीफ़ और कुछ ताने सिर्फ तु...
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आवाज़ दबाने वाले बहुत मिलेंगे, पर पहचान बनाने वाली सिर्फ तुम हो. दुनिया याद रखेगी सिर्फ तुम्हारी उड़ान, उनका शोर नहीं. उनकी कोशिश तुम्हें र...
Very nice and true
ReplyDeleteBahut khoob ati sundar
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