Sunday, 6 February 2022

व्यक्तित्व की पहचान

आज तक यही कहा है और यही कहूँगी में मैं हूं। ना आज और ना कल मैं तुम नहीं हो पाऊंगी। जैसे तुम्हारी सोच तुम्हारा काम, उठना, बैठना, खाना, रहना,तुम्हारे मित्र तुम्हारा परिवार और तुम्हारा व्यक्तित्व...वह सिर्फ तुम हो..
वैसा ही मेरा शरीर,मेरी सोच, मेरा काम वह मेरा व्यक्तित्व है... वह सिर्फ मैं हूं। जरुरी नहीं है की हम एक हो..
जरुरी नहीं है की जैसा तू सोचता है वैसा ही मैं सोचती हूं और हा सुनो वह इसलिए क्युकी व्यक्तितव अलग है तुम तुम हो और में मैं हूं...






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