कभी तेरी दहलीज तक नहीं आऊंगी
चाहके भी कभी तुझे अपना नहीं कहूँगी
खुद मिट जाउंगी खुद मर जाऊँगी
तेरे लिए तो सौ झूठ बोल जाउंगी
याद रखना
तेरी हर एक हा में हा थी
और हर एक ना में ना थी
ना तो कारवाँ की तलाश है, ना हमसफ़र की तलाश है… जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे, बस उसी रहगुज़र की तलाश है। (जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतल...
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