कभी तेरी दहलीज तक नहीं आऊंगी
चाहके भी कभी तुझे अपना नहीं कहूँगी
खुद मिट जाउंगी खुद मर जाऊँगी
तेरे लिए तो सौ झूठ बोल जाउंगी
याद रखना
तेरी हर एक हा में हा थी
और हर एक ना में ना थी
आजकल दिल और दिमाग पर एक अजीब सी ख़ामोशी और भारीपन छाया रहता है। कभी कभी लगता है जैसे पूरी दुनिया आगे बढ़ रही है और मैं कहीं पीछे, बिल्कुल अक...
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