उसकी आँखों में हमे अपनी दुनिया दिखाई देने लगी..
उसके होंठो पर हमे अपनी खुशिया दिखाई देने लगी..
मेरी धड़कन में अब उसकी तस्वीर बसने लगी…
पता ना चला कब कैसे…
चलते चलते मेरी तक़दीर बनने लगी...
ख़ुद को आपको सौंपना आसान था, मुश्किल तो तब लगा… जब एहसास हुआ कि मेरी क़ीमत ही नहीं समझी गई।
saras
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