उसकी आँखों में हमे अपनी दुनिया दिखाई देने लगी..
उसके होंठो पर हमे अपनी खुशिया दिखाई देने लगी..
मेरी धड़कन में अब उसकी तस्वीर बसने लगी…
पता ना चला कब कैसे…
चलते चलते मेरी तक़दीर बनने लगी...
ना तो कारवाँ की तलाश है, ना हमसफ़र की तलाश है… जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे, बस उसी रहगुज़र की तलाश है। (जो ख़ुदा से ख़ुद तक पहुँचा दे) मतल...
saras
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